Wednesday, 23 August 2017

What is women's rights ? ( क्या हैं महिलाओं के अधिकार ? )

महिलाओं को घरेलू हिंसा के खिलाफ अधिकार


महिला संरक्षण अधिनियम, 2005
घरेलू हिंसा का अर्थ
1-व्यक्ति अगर व्यथित महिला के स्वास्थ्य की सुरक्षा , उसके जीवन अंग या कल्याण को नुकसान पहुंचाता है , क्षतिग्रस्त करता है या खतरा पहुंचाता है या ऐसा करने की कोशिश करता है तो वह घऱेलू हिंसा में शामिल है ।
2-इसके अंतर्गत शारीरिक दुरुपयोग , मौखिक औऱ भावनात्मक दुरुपयोग तथा आर्थिक दुरुपयोग , यौन दुरुपयोग शामिल हैं ।
शारीरिक दुरुपयोग
शारीरिक दुरुपयोग का मतलब है कि कोई भी कार्य या आचरण जो ऐसी प्रकृति का हो जो कि व्यथित महिला के जीवन अंग या स्वास्थ्य को शारीरिक कष्ट पैदा करता है । इसके अंतर्गत हमला करना, अपराधिक अभित्रास औऱ आपराधिक बल इस्तेमाल करना शामिल है ।
यौन दुरुपयोग
यौन प्रकृति का कोई भी आचरण जो महिला की गरिमा का दुरुपयोग करता है , अपमानित करता है , तिरस्कृत करता है या उसको भंग करता है ।

Read More....

Saturday, 19 August 2017

खुशकिस्मत है वो, जो बेटी के बाप हैं

एक कहानी जो छू जाएगी आपके अंतर्मन को...

"पाँच साल की बेटी बाज़ार में
गोल गप्पे खाने के लिए मचल गई।

"किस भाव से दिए भाई?"
पापा नें सवाल् किया।

"10 रूपये के 8 हैं।
गोल गप्पे वाले ने जवाब दिया.......

पापा को मालूम नहीं था गोलगप्पे 
इतने महँगे हो गये है....
जब वे खाया करते थे तब तो एक रुपये के 10 मिला करते थे। . 
पापा ने जेब मे हाथ डाला 15 रुपये बचे थे।
 बाकी रुपये घर की जरूरत का सामान लेने में खर्च हो गए थे। 
उनका गांव शहर से दूर है 10 रुपये तो बस के किराए में लग जाने है। 

"नहीं भई 5 रुपये में 10 दो, तो ठीक है वरना नही लेने।

यह सुनकर बेटी नें मुँह फुला लिया....

"अरे अब चलो भी ,
नहीं लेने इतने महँगे।

पापा के माथे पर लकीरें उभर आयीं ....

"अरे खा लेने दो ना साहब..

अभी आपके घर में है तो
आपसे लाड़ भी कर सकती है...

कल को पराये घर चली गयी तो
पता नहीं ऐसे मचल पायेगी या नहीं. ...

तब आप भी तरसोगे बिटिया की
फरमाइश पूरी करने को...
.

.
गोलगप्पे वाले के शब्द थे तो चुभने वाले,
पर उन्हें सुनकर पापा को
अपनी बड़ी बेटी की याद आ गयी....
.
.
.
जिसकी शादी उसने तीन साल पहले 
एक खाते -पीते पढ़े लिखे परिवार में की थी......

उन्होंने पहले साल से ही उसे छोटी
छोटी बातों पर सताना शुरू कर दिया था.....

दो साल तक वह मुट्ठी भरभर के
रुपये उनके मुँह में ठूँसता रहा पर
उनका पेट बढ़ता ही चला गया ....

और अंत में एक दिन सीढियों से
गिर कर बेटी की मौत की खबर 
ही मायके पहुँची.....
.
.

आज वह छटपटाता है 
कि उसकी वह बेटी फिर से 
उसके पास लौट आये..? 
और वह चुन चुन कर उसकी 
सारी अधूरी इच्छाएँ पूरी कर दे...

पर वह अच्छी तरह जानता है 
कि अब यह असंभव है..


"दे दूँ क्या बाबूजी
गोलगप्पे वाले की आवाज से 
पापा की तंद्रा टूटी...

"रुको भाई दो मिनिट ....
पापा पास की उस पंसारी की दुकान पर गए
जहाँ से जरूरत का सामान खरीदा था। 
खरीदी गई पाँच किलो चीनी में से एक किलो चीनी वापस की तो 40 रुपये जेब मे बढ़ गए।

फिर ठेले पर आकर पापा ने डबडबायी आँखें 
पोंछते हुए कहा 
अब खिलादे भाई। 

हाँ तीखा जरा कम डालना। 
.
.
मेरी बिटिया बहुत नाजुक है....
सुनकर पाँच वर्ष की गुड़िया जैसी बेटी की आंखों में चमक आ गई 
.
.
और पापा का हाथ कस कर पकड़ लिया।

जब तक बेटी हमारे घर है 
उसकी हर इच्छा जरूर पूरी करे..

क्या पता आगे कोई इच्छा 
पूरी हो पाये या ना हो पाये ।

ये बेटियां भी कितनी अजीब होती हैं 
ससुराल में कितना भी प्यार मिले.....

माँ बाप की एक मुस्कान को
तरसती है ये बेटियां....

ससुराल में कितना भी रोएँ
पर मायके में एक भी आंसूं नहीं
बहाती ये बेटियां....

क्योंकि
बेटियों का सिर्फ एक ही आंसू माँ
बाप भाई बहन को हिला देता है
रुला देता है....
भगवान की अनमोल देंन हैं 
ये बेटियां ......

हो सके तो
बेटियों को बहुत प्यार दें
उन्हें कभी भी न रुलाये
क्योंकि ये अनमोल बेटी दो
परिवार जोड़ती है
दो रिश्तों को साथ लाती है।
अपने प्यार और मुस्कान से।

हम चाहते हैं कि
सभी बेटियां खुश रहें 
हमेशा भले ही हो वो
मायके में या ससुराल में।

●●●●●●●●
खुशकिस्मत है वो, जो बेटी के बाप हैं...!
 Save Angels Teach Angels


उन्हें भरपूर प्यार दे, दुलार करें और यही व्यवहार अपनी पत्नी के साथ भी करें क्यों की वो भी किसी की बेटी है और अपने पिता की छोड़ कर आपके साथ पूरी ज़िन्दगी बीताने आयी है। उसके पिता की सारी उम्मीदें सिर्फ और सिर्फ आप से हैं।